प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण सुविधा का उद्देश्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन एवं समुद्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी की विभिन्न विधाओं में नए वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकों के अनुप्रयोगों को बढ़ाना है।

इकमाम प्रशिक्षण सुविधा एक नजर में

इकमाम प्रशिक्षण केंद्र तथा “तटीय महत्वपूर्ण वास स्थलों के प्रबंधन में जीआईएस का अनुप्रयोग’’ पर दो सप्ताह के प्रथम प्रशिक्षण कार्यक्रम का उदघाटन 13 अगस्त, 2001 को डॉ. हर्ष के गुप्ता, सचिव, महासागर विकास विभाग, भारत सरकार द्वारा किया गया । इस प्रशिक्षण केंद्र में विशेष रूप से छात्र अध्यापक की परस्पर बातचीत, छात्रों के चुनिंदा समूह के बीच कम्प्यूटर कॉन्फ्रेसिंग, दो एलसीडी प्रोजेक्टरों के माध्यम से प्रत्येक छात्र के कम्प्यूटर के आउटपुट को दिखाने के लिए उच्च तकनीक वाली मल्टीमीडिया दृश्य-श्रव्य प्रणाली लगाई गई है। अन्य उपलब्ध सुविधाएं डिजीटाइजर, प्लोटर आदि हैं । एक सत्र में लगभग 25 प्रशिक्षणार्थी भाग ले सकते हैं। इस प्रशिक्षण हॉल में मल्टीमीडिया क्लास रूम बनाया गया है जो दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला क्लासरूम है । इस हॉल में लगभग 25 अत्याधुनिक वर्क स्टेशन पीसी लगाए गए हैं और प्रत्येक छात्र को पूरे पाठयक्रम के दौरान अपनी अलग मशीन उपलब्ध करवाई जाती है । दो उच्च –विभेदन एलसीडी प्रोजेक्टर भी उपलब्ध करवाए गए हैं ताकि दो विभिन्न आउटपुटों को एक ही समय पर दिखाया जा सके। इससे एक ही मामले के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया जा सकता है।

इकमाम प्रशिक्षण केंद्र में नियमित अंतराल पर निम्नलिखित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं :

1. तटीय संवेदनशील वास स्थलों के प्रबंधन में जीआईएस के अनुप्रयोग (2 सप्ताह), 2. जलीय प्रदूषण के प्रबंधन में जीआईएस के अनुप्रयोग (1 सप्ताह), 3. तट रेखा प्रबंधन (1 सप्ताह), 4. एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (1 सप्ताह), 5. तट के निकट के क्षेत्रों में तलछट परिवहन (1 सप्ताह), 6. उपग्रह समुद्र विज्ञान (2 सप्ताह)

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में व्याख्यान देने के लिए संस्थान के अपने विशेषज्ञों के अतिरिक्त निम्नलिखित प्रमुख संस्थानों से भी प्राध्यापकों को लिया जाता है।

  1. अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद
  2. राष्ट्रीय दूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद
  3. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै
  4. समुद्र प्रबंधन संस्थान, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नै
  5. दूर संवेदन संस्थान, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नै
  6. पर्यावरणीय अध्ययन केंद्र, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नै
  7. मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नै
  8. सीईएसएस, त्रिवेन्द्रम

व्याख्यान सत्रों के अलावा, अभ्यास सत्रों को भी समान महत्व दिया जाता है जिसमें

  1. भू-वैज्ञानिक सूचना प्रणाली
  2. डिजिटल उपग्रह डेटा बिंब प्रसंस्करण
  3. तट के निकटवर्ती जल में तलछट परिवहन
  4. तट रेखा परिवर्तनों का विश्लेषण
  5. समुद्र वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के लिए उपग्रह डेटा का प्रसंस्करण
  6. तेल रिसाव मॉडलिंग

पर व्यावाहरिक प्रयोग करवाए जाते हैं। ‘’ तटीय संवेदनशील वास स्थलों के प्रबंधन में जीआईएस के अनुप्रयोग’’ संबंधी दो सप्ताह के पाठ्यक्रम के दौरान अपने अपने परियोजना कार्य के लिए तीन दिन दिए जाते हैं। प्रशिक्षणार्थी अपने परियोजना कार्य के लिए हमारे पास उपलब्ध डेटा का प्रयोग कर सकते हैं या अपनी इच्छानुसार अपने स्वयं के डेटा ला सकते है।

आईएफएस अधिकारी जिन्होंने “एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन’’ संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया है।

अभी तक हम लगभग 14 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं तथा विभिन्न तटीय राज्यों के 191 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है । इन प्रशिक्षणार्थियों में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों सहित व्याख्याता, अनुसंधान वैज्ञानिक और छात्र शामिल हैं ।

पूर्ण रूप से सुसज्जित, कैंटीन सुविधायुक्त गेस्ट हाऊस कैंपस में ही उपलब्ध है जिसमें 230 रू. प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन की लागत से दो व्यक्तियों के ठहरने की सुविधा है। छात्रों के ठहरने के लिए 100 रू. प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन की लागत से ‘’ छात्र सुविधा केंद्र’’ में सुविधा उपलब्ध है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित अधिक जानकारी के लिए, संपर्क करें:

परियोजना निदेशक
इकमाम परियोजना निदेशालय,
राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान कैंपस,

वेलाचेरी- ताम्बरम मेन रोड़,
पल्लीकरणै, चेन्नै-600100, भारत
टेलि: 914422460276 फैक्स: 914422460657