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1992 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास संबंधी सम्मेलन (यूएनसीइडी) में स्वीकृत कार्यसूची 21 में तटीय एवं समुद्री संसाधनों के सतत् उपयोग और समुद्री पर्यावरण का अवक्रमण रोकने के लिए एकीकृत तटीय क्ष्‍ेात्र प्रबंधन (आईसीजेडएम) की संकल्पना को स्वीकार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया । इसे भूमि, तटीय और समुद्री क्षेत्रों में प्रचलित गतिविधियों का एकीकरण कर बेहतर ढंग से अपनाया जा सकता है।

भारत में समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जिम्मेदार पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (पूर्व में महासागर विकास विभाग) ने 2 जनवरी 1998 को चेन्नै (मद्रास) में इकमाम परियोजना निदेशालय की स्थापना की, जिसका उद्देश्य (i) यूएनसीईडी के तटीय और महासागर से संबंधित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए क्षमता विकसित करना और (ii) तटीय समुद्री क्षेत्रों के मुद्दों और समस्याओं पर ध्यान देने के लिए एकीकृत प्रबंधन समाधानों के विकास में उपयोगी वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकों के अनुप्रयोग पर अनुसंधान एवं विकास करना है। अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (विश्व बैंक) द्वारा वित्तपोषित एकीकृत तटीय एवं समुद्री क्षेत्र प्रबंधन (इकमाम) से संबंधित 4 प्रमुख क्षेत्रों की क्षमता निर्माण गतिविधियां सितंबर 1997 में प्रारंभ की गई थी और जून 2003 में ये पूरी कर ली गई। मंत्रालय ने अपनी स्वयं की निधि से इस अवधि के दौरान दीर्घ अवधि अनुसंधान और विकास तथा प्रशिक्षण के लिए अवसंरचना का विकास किया । वर्तमान में परियोजना निदेशालय देश की कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं को शामिल कर कुछ तटीय क्षेत्र के अनुसंधान और विकास कार्यकलापों में लगा हुआ है।